सोमवार, 16 मई 2022

स्वयं की मार्केटिंग कीजिए

 लोग आपको आदर नहीं देंगे,

जब तक आप स्वयं को आदर नहीं देंगे।

लोग आप की कीमत नहीं समझेंगे,

जब तक आप अपनी कीमत नहीं समझेंगे।

लोग आपकी प्रतिभा नहीं पहचानेंगे,

जब तक आप अपनी प्रतिभा नहीं पहचानेंगे

 मीडिया के वर्तमान युग में मार्केटिंग सफलता में अहम भूमिका निभाने लगी है। आप स्वयं को, और अपनी प्रतिभा को किस तरह पेश करते हैं, यह आज के दौर में बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। कुछ लोग कहते हैं कि यदि आपके अंदर योग्यता और प्रतिभा है तो वह एक दिन अवश्य पहचानी जाएगी। यह एक श्रेष्ठ विचार है परंतु वर्तमान युग में हर किसी की प्रतिभा स्वत: पहचान ली जाए, यह संभव नहीं है। लाखों लोग प्रतिभावान हैं परंतु चंद लोग ही शिखर पर जगह बना पाते हैं। आपकी प्रतिभा और आपके गुण आपके भीतर ही दबे रह जाते हैं यदि आप उन्हें पेश नहीं करते, उन्हें प्रदर्शित नहीं करते। हमें ऐसे कई लोग मिलते हैं जो चमत्कारिक तेजी से शीर्ष पर पहुंच जाते हैं, अपने समकक्ष लोगों को बहुत पीछे छोड़ देते हैं। यह लोग अपने विशिष्ट गुणों के साथ जीत का कॉमन सेंस भी इस्तेमाल करते हैं। मेरा मानना है कि सफलता के लिए जीनियस होने से कहीं ज्यादा जरूरी है, कॉमन सेंस होना।

यदि आप एक सफल गायक बनना चाहते हैं तो आपको अपना शानदार बायोडाटा, प्रशंसा पत्र, विशिष्ट फोटोग्राफ और अपने गीतों का ऑडियो सीडी या कैसेट विभिन्न संगीत कंपनियों और निर्देशकों को भेजना पड़ेगा, स्वयं की मार्केटिंग करनी होगी। अपने गुणों को सर्वश्रेष्ठ रूप से प्रस्तुत करना होगा। यदि आप सोच रहे हैं कि बिना मार्केटिंग किए घर बैठे एक दिन आप की प्रतिभा पहचान ली जाएगी तो आप गलत सोच रहे हैं। 


शुरुआती स्तर पर अपनी प्रतिभा का भोंपू स्वयं बजाना पड़ता है अपनी तारीफ स्वयं करनी होती है और खुद की मार्केटिंग करना शर्मिंदगी वाली बात नहीं है।

मुझे नौकरी हेतु भेजा गया एक उम्मीदवार का बायोडाटा याद है। उसने लिखा था- मैं एक असाधारण व्यक्ति हूं और आपकी कंपनी के लाखों रुपए पहले दिन से ही बचा सकता हूं, साथ ही बिना ₹1 खर्च किए आपको 10% अतिरिक्त कर्मचारी दे सकता हूं। इंटरव्यू के पहले ही उसका नाम इंटरव्यू पैनल के सदस्यों की जुबान पर था। कोई उसे मूर्ख कह रहा था, कोई साहसी तो कोई असाधारण, लेकिन हर कोई उसकी बात सुनना चाहता था। वह सब का ध्यान खींचने में कामयाब हो चुका था।

इंटरव्यू में उससे पहला सवाल पूछा गया - क्या तुमने बायोडाटा में जो लिखा है, वह सच है ? उसने जवाब दिया - हां, वह सच है। पैनल ने पूछा - कैसे संभव है ? उसने कहा - महोदय, नौकरी के लिए आवेदन देने के पहले मैंने आपकी कंपनी की कार्यशैली और कर्मचारियों के तौर-तरीकों का अध्ययन किया है, इसमें मैंने पाया कि - 

आप के लगभग 100 कर्मचारी आधा घंटा देर से आते हैं और आधा घंटे पहले ही चले जाते हैं। आप साल में कुल मिलाकर 36500 घंटों की तनख्वाह मुफ्त बांट रहे हैं। 

यदि आपके संस्थान में कार्य की अवधि 8 से 10 घंटे की है तो यह मानें कि आप के 100 कर्मचारी प्रतिदिन एक घंटा देर से आने और जल्दी जाने की वजह से 10% समय व्यर्थ करते हैं। 

यदि सबको समय पर पहुंचना अनिवार्य कर दिया जाए तो 36500 घंटों की मुफ्त तनख़ाह बचेगी और 10% कार्य के घंटे बढ़ जाएंगे। 

उस उम्मीदवार ने सबके दिलों में जगह बना ली और चुन लिया गया। अपने आप को विशिष्ट दिखाने का और, प्रतिभावान कहलाने का प्रयास कीजिए। लोगों से मिलिए, उन्हें प्रभावित कीजिए, अखबारों में लिखिए, सुर्खियों में दिखिए। जो कर सकते हो वह सब कुछ कीजिए, लेकिन भीड़ से अलग नजर आइए।


जब आप खुद की मार्केटिंग करेंगे तो लोग आपको कई तरह के नाम देंगे जैसे अवसरवादी, अति महत्वाकांक्षी, ओवर स्मार्ट, चापलूस आदि। उनकी परवाह मत कीजिए क्योंकि थोड़े दिन बाद उनकी जुबान पर एक ही शब्द बचेगा - सफल।

स्वयं को सलीके से पेश कीजिए, अच्छा पहने श्रेष्ठ नजर आइए, अपनी बाहरी आवरण पर ध्यान दीजिए, व्यक्तित्व ही सकारात्मक प्रथम प्रभाव ( फर्स्ट इंप्रेशन ) बनाता है। अपने गुणों को उजागर कीजिए, अपनी प्रतिभा लोगों के सामने लाइए। यह मत सोचिए कि कौन क्या कहेगा। इसलिए आज से ही स्वयं के मार्केटिंग करना प्रारंभ कर दीजिए।

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