गुरुवार, 31 मार्च 2022

जैसा नजरिया वैसा संसार

 दुनिया को देखने का हर व्यक्ति का अपना नजरिया होता है। गुलाब के पौधे में किसी को फूल नजर आता है तो किसी को कांटे। जो व्यक्ति जैसा सोचता है उसे दुनिया वैसी ही नजर आती है। कुछ लोगों को समस्या दिखती है तो कुछ लोगों को हर और अवसर दिखाई देते हैं। कुछ लोग जन्मदिन पर दुखी होते हैं कि उम्र कम हो गई तो कुछ खुश होते हैं कि एक शानदार साल बीता और एक शानदार साल सामने हैं। अपनी सोच के अनुसार चीजें नजर आती हैं और वैसे ही घटती हैं।



इस बात को समझने के लिए हम एक कहानी का उदाहरण ले सकते हैं। चार अंधे एक राजा के दरबार में गए। राजा ने उन्हें एक हाथी दिया और कहा जिसका तुम स्पर्श कर रहे हो उसका वर्णन करो। जो व्यक्ति पूंछ की तरफ खड़ा था उसने कहा कि हाथी रस्सी की तरह होता है। जो व्यक्ति पैर की तरफ खड़ा था उसने कहा कि हाथी मोटे तने की तरह होता है। जो व्यक्ति सूंड की तरफ था उसने कहा कि हाथी सांप की तरह होता है। जो व्यक्ति पेट की तरफ था उसने कहा हाथी मोटी दीवार की तरह होता है और चारों ही बहस में उलझ पड़े।

कहना यही है कि हर व्यक्ति हर वस्तु और घटना को अपने नजरिए से देखता है। एक व्यक्ति किसी के लिए बुरा हो सकता है तो किसी दूसरे के लिए अच्छा भी हो सकता है। एक ही वस्तु या मुद्दे के बारे में विभिन्न लोगों की विभिन्न राय होती है और सब अपना राग अलापने हुए उसी बात पर अड़े रहते हैं। इसीलिए अपने नजरिया पर काम कीजिए यदि आपका नजरिया सुख ढूंढने वाला होगा तो सुख स्वयं ही आपका साथी बन जाएगा। यदि आपका नजरिया दुख ढूंढने वाला रहेगा तो दुख आपका कभी भी पीछा नहीं छोड़ेगा। सुख ढूंढने की आदत बनाएं विपत्तियों में अवसर ढूंढने का प्रयास करें क्योंकि सिर पकड़कर बैठने से कुछ नहीं होगा।

जूतों की एक प्रसिद्ध कंपनी ने अफ्रीका में अपना कारोबार फैलाने के लिए एक सेल्समैन को बाजार का जायजा लेने भेजा। सेल्समैन ने वहां पहुंच कर देखा कि अधिकतर लोगों के पैरों में जूते नहीं थे। निराश होकर उसने कंपनी को रिपोर्ट भेजी की बुरी खबर है वहां कोई जूते नहीं पहनता। उसके बाद कंपनी ने दूसरे सेल्समैन को भेजकर उसकी राय जाननी चाही। कुछ समय बाद उत्साहित मैनेजर की रिपोर्ट मिली। उसने लिखा बहुत अच्छी खबर है। यहां अच्छा व्यवसाय होने की पूरी संभावना है हमें खूब मुनाफा होगा। यहां के लोग जूते नहीं पहनते बस एक बार उन्हें जूतों का महत्व समझाना होगा।

इस उदाहरण से आपको समझ आ ही गया होगा कि स्वयं को आशावादी सकारात्मक सोच देना कितना जरूरी है। स्वयं का और अपने परिवार के सही नजरिया का विकास कीजिए। आशावादी सकारात्मक सोच दीजिए। यदि नजरिया नकारात्मक है तो आप तमाम सुविधाओं के बीच भी परेशान ही रहेंगे। लोग तमाम गलतियों के लिए दूसरों को ही जिम्मेदार मानते हैं। इसलिए एक क्षण ठहरिए और अपने नजरिए पर गौर कीजिए। दुनिया में सब को बदलने का असफल प्रयास करने से सरल है आप खुद को ही बदल दो।

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