हमें कुछ लोगों की क्षमता और प्रतिभा पर बेहद विश्वास होता है । हमें पूरा यकीन होता है कि वह व्यक्ति जीवन में जरूर सफल होगा । कुछ महीनों या सालों के बाद जब उस व्यक्ति पर पुनः गौर करते हैं तो उसे असफल या औसत जिंदगी बिताते हुए देखकर हैरानी होती है मन में कई तरह के सवाल उठते हैं कि आखिर सब कुछ होते हुए भी वह व्यक्ति असफल क्यों हो गया?
उपलब्धियां कार्य करने से हासिल होती हैं , यदि आप पूरी लगन से अपनी क्षमता को कार्य करने में नहीं लगाएंगे तो ढेर सारे गुण होते हुए भी आप आम ही रह जाएंगे । इसीलिए सिर्फ प्रतिभा, योग्यता और क्षमता होना सफलता की गारंटी नहीं है।
मैंने बहुत से लोगों को क्षमतावान होते हुए भी सुनहरे अवसर को खोते हुए देखा है । केवल अपने बहानों से वे अपनी विफलता को ढक कर रखते हैं । टाइम नहीं है, बिजी था , सांस लेने की फुर्सत नहीं है, जो लोग ये लाइनें इस्तेमाल करते हैं , वे लोग बिना कार्य के व्यस्त लोग होते हैं।
आम भारतीयों में टालने की जबरदस्त प्रवृत्ति होती है । हम हर रोज काम को टालते हैं । वह काम धीरे-धीरे इमरजेंसी बन जाता है । हमें उसका तनाव झेलना पड़ता है । और उसके लिए अतिरिक्त धन भी खर्च करना पड़ता है । इस आलस और टालमटोल से गैर जरूरी काम जमा हो जाते हैं । और इनके चक्कर में जरूरी काम छूट जाते हैं। आप भी बहुत से ऐसे लोगों को जानते होंगे , जो हमेशा व्यस्तता का बहाना करते हैं लेकिन हकीकत में सबसे ज्यादा खाली समय उन्हीं के पास होता है।
जरा ठंडे दिमाग से एक नजर अपनी दिनचर्या पर डालिए , कहीं आप भी तो समय व्यर्थ करने और टालमटोल की प्रकृति का शिकार तो नहीं है। ऐसे ढेर सारे कार्य हैं जिनमें हम रोज समय व्यर्थ करते हैं । जैसे ज्यादा देर से उठना ,अनावश्यक टीवी देखना , बिना बात के तर्क वितर्क करना , ज्यादा मोबाइल पर बात करना , जहां आवश्यकता ना हो वहां भी ज्ञान सिद्द्ध करना , निंदा करना , जो समस्याएं अस्तित्व में नहीं है उन पर भी चिंता करना और स्वयं का गुणगान करना।
लेकिन अधिकांश लोग अपनी आदतों तथा दिनचर्या पर गौर नहीं करते । पहले मुझे भी समय की कमी बहुत महसूस होती थी । फिर मैंने अपनी दिनचर्या पर गौर किया तो शुरुआत में लगा कि मैं जरा भी समय व्यर्थ नहीं गंवाती हूं । फिर पुनः गहराई से बार बार सोचा तो मेरी दो मुख्य गलतियां सामने आई। मैं मोबाइल पर अधिक बात करती हूं तथा मैं बहस में बढ़-चढ़कर भाग लेती हूं । फिर मन में विचार आया कि मैं किसी भी बहस में मुफ्त की सलाह बांट देती हूं । कुछ देर तक तो बहस में जीतने की खुशी होती है । ज्ञानी का लेबल लग जाता है । परंतु बाद में उस हारे हुए व्यक्ति के साथ रिश्तो में दरार आ जाती है । और समय भी खराब होता है। मैंने उसी क्षण निर्णय लिया कि अब बिना परिणाम की बहस नहीं करूंगी और साथ ही मोबाइल पर सिर्फ आवश्यकतानुसार ही बात करूंगी । अब हर रोज 45 मिनट मेरे पास अतिरिक्त रहते हैं जिनमें कई और कार्य हो जाते हैं।
यदि आपके काम भी अधूरे छूटते हैं आपको भी काम भूलने की आदत है तो आप 1 महीने तक रोज के कार्य लिखें और जो कार्य पूरे होते जाएं उन्हें काट दें। जो काम करना जरूरी हो उन्हें तुरंत करें और जिन्हें नहीं करना हो उनके लिए "ना" कहना सीखे। "ना" सुनकर एक बार दूसरों को बुरा लग सकता है लेकिन मैं दूसरी बार वे आपका समय नष्ट नहीं करेंगे। हर रात सोने से पहले अगले दिन के कार्यक्रम को अपनी डायरी में लिखे । इससे आपको टालमटोल या बहानेबाजी नहीं करनी पड़ेगी। यदि आप किसी अति महत्वपूर्ण कार्य में व्यस्त नहीं है और कोई कार्य याद आए तो उसे तुरंत करें उसे बाद के लिए ना टालें ।
मित्रों ,रोज के छोटे-छोटे कार्यों में टालमटोल करेंगे तो बड़े कार्य नहीं कर पाएंगे । मुझे उम्मीद है कि आप समय व्यर्थ करके और काम टालकर अपने भविष्य और सपनों के साथ विश्वासघात नहीं करेंगे।



Very useful
जवाब देंहटाएंThank you dear
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