इस विषय की शुरुआत मै एक कहानी से करता हूं।
एक धनी पिता अपने बेटे को गरीब किसानों की बस्ती दिखाने ले गया। वह अपने बेटे को बताना चाहता था कि लोग कितने ज्यादा गरीब हैं। वह दोनों एक रात एक गरीब किसान के खेत में रुके। खेत में रात बिताने के बाद सुबह लौटते समय पिता ने पुत्र से पूछा- यात्रा कैसी रही ? बेटे ने जवाब दिया- बहुत अच्छी । पिता ने कहा - तुमने देखा लोग कितने गरीब हैं । बेटे ने जवाब दिया - मैंने देखा हमारे पास एक कुत्ता है लेकिन उनके पास चार हैं । हमारे पास घर के अंदर एक छोटा सा स्विमिंग पूल है लेकिन उनके पास ढेर सारी पानी वाली नदी है । हमने अपने बगीचे में रोशनी के लिए इंपॉर्टेंट लैंप लगा रखे हैं लेकिन उनके पास आसमान के सितारे हैं । यह सुनते ही पिता के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई क्योंकि वह अपने पुत्र के जीवन में सकारात्मक संस्कार डालने में सफल हो गए थे ।
शेक्सपियर ने भी कहा है कि कोई वस्तु अच्छी या बुरी नहीं होती परंतु हम उसके बारे में जैसा सोचते हैं वह वैसी हो जाती है ।
" दिमाग एक उपजाऊ भूमि है नकारात्मक और सकारात्मक दोनों ही फसलों की उसमें पैदावार होगी, यह आप पर निर्भर है आप बीज सकारात्मक विचारों के बोते हैं या नकारात्मक विचारों के " ।
नकारात्मक सोच वाले लोग अक्सर उन बातों पर रोकर और निंदा करके समय व्यर्थ गवाते हैं जिन्हें बदल नहीं सकते इस वजह से वह कार्य भी नहीं कर पाते जिन्हें वे कर सकते हैं । सकारात्मक सोच वाले उन कार्यों में पूरा समय लगाते हैं जिन्हें वे कर सकते हैं और उन पर दिमाग ही नहीं लगाते जिन पर नियंत्रण संभव नहीं ।
मेडिकल साइंस कहता है स्वस्थ रहने के लिए सालों तक पोष्टिक आहार लेना पड़ता है और अस्वस्थ रहने के लिए चुटकी भर जहर काफी है ठीक उसी तरह लगातार सफलता पाने के लिए सकारात्मक सोच रखनी चाहिए । और नकारात्मक सोच पर १००% पाबंदी होनी चाहिए ।
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