दुनिया में हर व्यक्ति के जीवन के अलग-अलग लक्ष्य होते हैं सबकी सोच में फर्क होता है और सोच के अनुसार ही इंसान अपनी प्राथमिकताएं तय करता है।
कुछ लोग अपने काम को सर्वोच्च मानते हैं उनका परिवार उनके लिए उतना महत्व नहीं रखता। कुछ लोग ऐशो आराम वाली जीवनशैली को प्राथमिकता देते हैं तो उनका काम और व्यवसाय प्रभावित हो जाता है।
हमें सबसे पहले गंभीरता से अपनी प्राथमिकता के बारे में सोचना चाहिए। हमें क्या चाहिए ?परिवार ,मित्र ,पैसा ,कार्य क्षेत्र में तरक्की ,सामाजिक प्रसिद्धि या कुछ और।
सभी यही कहते हैं कि परिवार और कार्यक्षेत्र में संतुलन होना चाहिए लेकिन हकीकत में ऐसा हो नहीं पाता है। हमेशा कोई ना कोई पहलू असंतुष्ट ही रह जाता है। एक छोटी सी कहानी आपको अपनी जिंदगी की प्राथमिकताएं तय करने में आपकी मदद करेगी।
एक भरी हुई सभा में एक प्रेरक ने कांच का खाली बर्तन उपस्थित लोगों को दिखाया। उसमें पत्थरों के बड़े बड़े टुकड़े डालें और वह बर्तन भर गया। फिर प्रेरक ने लोगों से पूछा कि क्या इसमें और कुछ आने की जगह है। सभी ने कहा कि नहीं यह पूरा भर चुका है।
प्रेरक ने छोटे आकार के कंकड़ उठाएं और बर्तन में डालें। वो कंकड़ बड़े पत्थरों के बीच की जगह को भरने लगे। धीरे-धीरे काफी मात्रा में कंकड़ उस बर्तन में आ गए। फिर से प्रेरक ने पूछा कि क्या इस बर्तन में और कुछ आ सकता है। अधिकांश ने जवाब दिया कि नहीं यह तो पूरा भर चुका है अब इसमें कुछ भी नहीं आ सकता।
प्रेरक ने पुनः उस कांच के बर्तन को उठाया और उसमें रेत डालने लगा। थोड़ा बर्तन को हिलाया तो काफी मात्रा में रेत उसके अंदर चली गई। बड़े पत्थरों और कंकड़ों के बीच की खाली जगह को रेत ने भर दिया। सभी उपस्थित लोग निरुत्तर हो गए।
अंत में प्रेरक ने पूछा कि क्या अब इसमें और जगह है क्या अभी इसमें कुछ आ सकता है। अब लोगों ने उस कांच के बर्तन को हिला डुला कर देखा और उत्तर दिया कि अब इसमें कुछ और आने की कोई गुंजाइश नहीं है।
प्रेरक ने पुनः उस कांच के बर्तन को उठाया और पानी डालना शुरू किया। पानी अपनी जगह बनाते हुए पत्थर कंकड़ और रेत के साथ मिलता चला गया। अब सभी लोगों के सर झुक चुके थे। प्रेरक ने कहा यदि इन पत्थरों की जगह इसमें पहले रेत भर दी जाती तो वह पत्थर इसमें नहीं आ पाते। यदि इस बर्तन में कंकड़ या पत्थर की जगह पहले पानी भर दिया जाता तो पत्थर डालते ही पानी छलक जाता।
मित्रों हमें अपनी सामान्य सोच से एक कदम आगे आकर सोचना चाहिए। यदि आपकी प्राथमिकताएं सही है तो आप सभी पहलुओं में संतुलन बना सकते हैं। जिस प्रकार इस कांच के बर्तन में पहले बड़े पत्थर फिर कंकड़ फिर रेत और अंत में पानी, यह सब आ गए। ठीक उसी प्रकार जीवन में यदि आपको परिवार ,कार्यक्षेत्र ,स्वास्थ्य ,समाज आदि में सही सामंजस्य स्थापित करना हो तो आपको पहले सही प्राथमिकताओं को निर्धारित करना होगा।
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